क्षेत्रीय श्रीबाथ्री साहू समाज, आठनेर
सूचना
04-07-2026 दीनदयाल बिरदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥ जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपत्ति नाना बिधि पावहिं॥ कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ गुरु गृह गए पढ़न रघुराई। अलप काल बिद्या सब आई॥ बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई॥ सीताराम सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम सीता राम........
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